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गुरु पद वंदनम्..


।। गुरु पद वंदनम्।।

करोमि  गुरु पद   वंदनम्।
महा    महीम     नन्दनम्।।

अजस्र  ज्ञान   धार    हो
शुचि   कर्म के विचार हो
जगत्   वंद्य    सार    हो
ज्ञान   के     प्रसार    हो
शोभित   ललाट चंदनम्।। करोमि - - - - -

ज्ञान   के   प्रदीप     हो
सागर    मध्य  सीप   हो
शिष्य    के   समीप    हो
पावस  ऋतु   के  नीप हो
करोतु   अज्ञान  खण्डनम्।। करोमि - - - - - -

तम     भरा    पथ     है
शरीर  स्वेद  स्लथ     है
घृत     समुद्र     मथ   है
सारथि   अत्र  विरथ   है
त्वम्   महा   तम् भंजनम्।। करोमि - - - - - -

मै   मोह  मद   घिरा  हुआ
मन मस्तिष्क से फिरा हुआ
विवेक    अद्य    निरा  हुआ
नदी     नद्य      तिरा   हुआ
त्वमेव  भव   अघ   गंजनम्।। करोमि - - - - -

तुम   सरस्वती   के  पूत   हो
प्रकाश   के   महान  दूत   हो
फलों   मे    मधुर   च्यूत    हो
तूं   कर्पट     मध्य   सूत    हो
वाञ्छामि    ज्ञान    स्यन्दनम्।। करोमि - - - -

स्वरचित मौलिक
गुरु पूर्णिमा पर विशेष   
     ।। कविरंग।।                             
     सिद्धार्थ नगर (उ0प्र0)

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