कलम लाइव पत्रिका

ईमेल:- kalamlivepatrika@gmail.com

Sponsor

Tulsi ka vivah--shaligram patthar/तुलसी की कहानी/शालिग्राम पत्थर

 तुलसी कौन है..?

तुलसी की कहानी  (Tulsi ki kahani)

क्यों किया जाता है तुलसी विवाह ?

🌿 तुलसी (पौधा) अपने पूर्व जन्म मे एक कन्या थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था। बाल्यकाल से ही भगवान विष्णु की भक्त थी। बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी। जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया। जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था.



 वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी, सदा अपने पति की सेवा में लगी रहती थी.एकबार देवताओ और दानवों में घोर युद्ध हुआ,जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा- "स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है,आप जब तक युद्ध में रहेगे, मैं तब तक पूजा में बैठ कर आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करूँगी और जब तक आप वापस नहीं आ जाते मैं अपना संकल्प नहीं छोड़ूँगी। ये सुन जलंधर तो युद्ध में चले गये और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी। वृंदा के व्रत के प्रभाव से देवता जलंधर से युद्ध में जीत नहीं पा रहे थे। सारे देवता जब हारने लगे तो श्री विष्णु जी के पास गये.

श्रीहरि का छल

सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि– वृंदा मेरी परम भक्त है, मैं उसके साथ छल नहीं कर सकता फिर देवता बोले- भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है, अब आप ही हमारी सहायता कर सकते है. तब भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण किया और वृंदा के महल में पँहुच गये जैसे ही वृंदा ने अपने पति को देखा वे तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिए। जैसे ही वृंदा का संकल्प टूटा, दुसरी ओर युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया.उनका सिर वृंदा के महल में आकर गिरा.जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पड़ा है तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है..? उन्होंने पूछा- आप कौन हो जिसका स्पर्श मैने किया..?

विष्णु का वास्तविक रूप में आना

भगवान अपने रूप में आ गये पर वे कुछ ना बोल सके.वृंदा सारी बात समझ गई। उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया कि आप पत्थर के हो जायेगे। ऐसा श्राप देते ही भगवान तुंरत पत्थर के हो गये. सभी देवता हाहाकार करने लगे लक्ष्मी जी रोने लगी और वृंदा से प्रार्थना करने लगे, तब वृंदा जी ने भगवान को वापस वैसा ही कर दिया और अपने पति का सिर लेकर वे सती हो गयी.

तुसली का जन्म और शालिग्राम पत्थर

Tulsi ka vivah

🌿 उनकी राख से एक पौधा निकला तब भगवान विष्णु जी ने कहा– आज से इनका नाम तुलसी है और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जाएगा और मैं बिना तुलसी जी के भोग स्वीकार नहीं करूंगा.तब से तुलसी जी कि पूजा सभी करने लगे और तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास की देव-उठावनी एकादशी/देवोत्थान एकादशी के दिन किया जाने लगा और इस दिन को तुलसी विवाह के रूप मे भी जाने जाना लगा.

तुलसी विवाह की हार्दिक शुभकामनाएं ।

No comments:

Post a Comment