।। दीपक जलायें।।
स्वयं की खुशियों के लिएइक दीपक जलाएं।
अप्प दिप्पो भव का
मंत्र दुहराएं ।।
प्रकाश हो जब अपना
पर प्रकाश केवल सपना।
मार्ग औरों को दिखायें
नित् ज्ञान गंगा मे नहांयें।।
चलना कठिन पर मार्ग पर है
सबसे सरल स्व मार्ग ही है।
प्यार ही सबको सिखायें
प्रेम से रिश्ते निभाएं।।
अहिंसा से हुआ कल्यान है
हिंसा भरा दिल पाषान है।
गौतम का सदा संदेश गायें
भाईचारा सबसे बढ़ायें।।
परोपकार जैसा ना कार्य जग मे
टिक न सकता विघ्न मग मे।
वसुधैव कुटुम्बकम का सपना सजायें
हर व्यक्ति को गले से लगायें।।
मन जाति वर्ग मे ना बंद हो
हर कार्य तेरा स्वच्छंद हो।
प्रत्येक गिरे को ऊपर उठायें
नव भारत का संकल्प लायें।।
स्वरचित मौलिक
।। कविरंग।।


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