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जिंदगी.... Jindagi

         "जिंदगी"

कभी धूप तो कभी छाँव हैं ज़िन्दगी।
कभी जेठ की दुपहरी तो कभी मधुमास हैं जिंदगी।
कभी इम्तिहान तो कभी परिणाम हैं जिंदगी।
कभी आजमाइश तो कभी परिहास हैं जिंदगी।
कभी काँटों का ताज तो कभी उपवन हैं जिंदगी।
कभी ख्वाहिशों का अंबार तो कभी सुकून हैं जिंदगी
कभी गम तो कभी गुनगुनाहट हैं जिंदगी।
कभी व्यवस्थित तो कभी बेलगाम हैं जिंदगी।
कभी धरा तो कभी आसमान हैं जिंदगी।
तेरे कितने रूप पर हर हाल में बेमिसाल हैं जिंदगी।

मान कँवर "मैना"
भवानीपुरा,खाटूश्यामजी,सीकर,राजस्थान।
स्वरचित एवं मौलिक

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