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क्या जग मे यही प्यार है.. kya jag me yahin pyaar h


।। प्रेम।।

जीवन  का  जो  आधार  है।
क्या जग मे यही  प्यार   है।।

हृदय  ग्रंथि   जब  जाये छूट
जब  सारे  बंधन  जाये  टूट।
रहे   न   जहां    कोई    लूट
दुनिया मे   जो     सार     है।। क्या - - - - - -

अंतस   मे  जब  उठे   हूंक
वाणी  जहां हो  जाये  मूक।
उठने लगे रोम-रोम मे कूंक
हुआ विश्व   जहां  असार है।। क्या - - - - -

देखे   बिना   चैन  न   आये
जगह एक मन थिर न रहाये।
जहांँ मे वह  पागल कहलाये
जीत मे भी  जगा    हार    है।। क्या - - - - -

रिश्ते - नाते  छोटे पड़ जाये
तूं  ही  तूं   मन   को   भाये।
वही  केन्द्र  बिन्दु  हो   जाये
दुश्मन   जैसे     संसार    है।। क्या - - - - -

पोर- पोर   मे   जागे   भूख
रह   न   जाये    कोई  चूक।
जवाब   तेरा  होवे  दो  टूक
जहां शब्द   हुआ   लाचार है।। क्या - - - - - -

              ।। कविरंग।।

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