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पति बड़ा ही बेबस और लाचार है.. Pati bada hi bebas or lachar h


।। लाचार पति।।

आज नारियों का हसीन संसार है।
पति बड़ा ही बेबस और लाचार है।।

विश्व  मे   नहीं  रहीं अबला
सर  पे  बजाती   हैं  तबला।
मर्दों को  पहुंचादी है कर्बला
फिर भी पुरुष ही  दागदार है।। पति बड़ा - - - - -

कहां  रहा  वो  पहले   का रूप
हुई कमल को जलाने वाली धूप।
रिक्त  हो  गया  स्नेह   का   कूप
जहां मे मिलता प्रेम भी उधार है।। पति बड़ा - - - - -

वो  दासी  नहीं  तुम   उनके  दास
सोंचो हो इक्कीसवीं सदी के पास।
दिल  से  निकालो  सेवा की आस
आज हुई सीधी गंगा   की धार है।। पति बड़ा - - - - -

तुम  क्रीत   गुलाम   जो  ठहरे
दहेज  लेकर  क्यों  बने   बहरे।
सो   रही   वो  तुम  देते   पहरे
अब नसीब को  सेवा स्वीकार है।। पति बड़ा - - - - - -

पड़   गयी    है  घर   पर   शादी
होगा सत्यानाश रुपयों की बर्बादी।
खाना बंद, बेगम  ने  मुख फुलादी
जेवरों के नाते  लाखों के कर्जदार हैं।। पति बड़ा - - - -

संदूक   जेवरों   से   भरा   है
फिर भी तेवर  मुझपे कड़ा है।
स्वर्णकार दरवाजे पे  खड़ा है
मेरे  हालत पे हँसता सुनार है।। पति बड़ा - - - - -

स्वरचित मौलिक

                         ।। कविरंग।।

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