बापू के प्रति
।। 1।।
दो अक्टूबर है प्यारा, जगत का उजियारा, श्रद्धा उमड़त सारा, बापू जन्म आयो है।
जगह-जगह खुशी, आँखें आज खूब हँसी, असत्यता आके फँसी, मोद अधिकायो है।।
तोरण बंदनवार, सजा दफ्तर दीवार, छाया आँखों मे खुमार, साकारता पायो है।
बच्चे सब खुशहाल, छोड़ चले ननिहाल, भरा विद्यालय हाल, झंडा फहरायो है।।
।। 2।।
तिरंगा लहरै आज, हुआ नूतन समाज, बाजै शहनाई साज, श्रद्धा बरसात है।
उड़त रंग गुलाल, भये सब लाल - लाल, रंगीन मधुर ताल, खुशी बिखरात है।।
सत्य अहिंसा के पुजारी, पड़ी पीछे जहां सारी, हम बापू के आभारी, बड़ी औकात है।
मस्ती में झूमैं दुनिया, रुई कै कातैं पुनिया, फेल हैं सारा धुनिया, चरखा चलात है।।
।। 3।।
आजाद कियो देश को, कभी न सोंचै भेष को, वो भजै परमेश को, बहुत प्रताप है।
राम-राम जपैं रोज, नये-नये होत खोज, मुख पर छाये ओज, करत ना पाप हैं।।
जग उन्हें पूजै आज, खंड है अंग्रेजी राज, किसी से ना कोई दांज, बात साफ - साफ है।
स्वच्छता पढ़ाये वह, गरीब को उठाये वह, अहिंसा बढ़ाये वह, असत्य संताप है।।
।। 4।।
बुरी है बुराई लोग, करो तुम सत्य योग, फीको है बावन भोग, सत्य भगवान है।
हिंसा से उपजै दुख, पाओगे ना कभी सुख, वाक् कटु लाओ न मुख, बड़ो दयावान है।।
दुनिया के देखि रंग, छोड़ो ना अपना ढंग, तूं गहो सबकी संग, वही बलवान है।
संचय सहाय होवै, अपना- पराय होवै, कोई तो उपाय होवै, सही धनवान है।।
स्वरचित मौलिक ।।कविरंग ।।
पर्रोई - सिद्धार्थ नगर( उ0प्र0)


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