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February 04, 2022

गधे और व्यापारी की कहानी/ /gadhe or namak ke vyapari ki kahani/बाल कहानियां

 

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गधे और व्यापारी की कहानी/gadhe or vyapari ki kahani

यह कहानी एक धोखेबाज गधे की कहनी है, जिसमे गधा अपने मालिक का नुकसान बार -बार करता है| मालिक को इसका पता चलता है तो वह इस गधे को बहुत बढ़िया सबक सिखाता है| उसके बाद गधा कभी भी अपने मालिक को धोखा नहीं देता है| आइये कहानी को शुरू करते है|

गधे or व्यापारी
नमक का व्यापारी or गधा 

गधे और व्यापारी की कहानी/gadhe or vyapari ki kahani

बहुत पुराने समय की बात है, एक गाँव में एक नमक का व्यापारी था। वह नमक का व्यापार करने के लिए हर दिन शहर जाया करता था। नमक को शहर के बाज़ार तक ढोने के लिए उसके पास एक गधा था। वह नमक के बोरियां को गधे के ऊपर लादकर हर दिन शहर की जाता था और शाम को वापस आता। परन्तु शहर जाने के लिए उन्हें एक नदी को पार करना पड़ता था।
 
एक दिन व्यापारी नमक की बोरियों को गधे पर लादकर सुबह - सुबह शहर की ओर निकल पड़ा। उस दिन बारिश के कारण नदी का बहाव ज्यादा था तो गधा पानी में गिर पड़ा। पानी में गिरने के कारण सारा नमक पानी में घुल गया और पानी के साथ बह गया। व्यापारी बहुत दुखी हुआ और गधे को लेकर वापस घर लौट आया।
अगले दिन सुबह व्यापारी दोबारा नमक की बोरियों को गधे पर लादकर शहर की ओर चल पड़ा। जब वह उसी नदी को पार कर रहा था तो गधा दोबारा पानी में गिर पड़ा और सारा का सारा नमक पानी में घुल गया। उस दिन भी व्यापारी दुखी होकर घर लौट आया।
 
आज भी व्यापारी रोज की तरह सुबह फिर शहर के बाज़ार की और चल पड़ा। इस दिन भी नदी के पानी में गधा गिर पड़ा और सारा नमक बर्बाद हो गया। अब व्यापारी को  धोखेबाज़ गधे की जान पूछ कर गिरने की चालाकी का पता चल गया और उसने उसे सीधा करने का उपाय ढूँढा लिया।

इस बार सुबह शहर की ओर निलते समय व्यापारी ने गधे के ऊपर नमक के बजाये रुई की बड़ी बोरियां लाग दी। जब गधा नदी को पार कर रहा था तो दोबारा उसने गिरने का नाटक किया। जब वह पानी में गिरा तो बोरी में भरे हुए रुई ने सारा पानी सोंख लिया और उनका वज़न इतना बढ़ गया की गधा ठीक से चल भी नहीं पाया। तब व्यापारी ने जोर-जोर से डंडा मार-मार कर गधे को पानी से बाहर निकाला। इस तरह अंत में गधे को अपनी गलती का एहसास हो गया और उसने फिर कभी भी व्यापारी को दुबारा धोखा नहीं दिया। 

gadhe or vyapari ki kahani

शिक्षा:- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हमें हमेशा ईमानदारी से अपना काम करना चाहिए।  किसी को धोखा नहीं देना चाहिए। नहीं तो इस कहानी के गधे जैसी हालत होती है। 
नोट- यह कहानी आपको कैसी लगी कोमेंट करके जरुर बताए| आप यहाँ पर और भी कहानियां पढ़ सकते है| आपको किस प्रकार की कहानी पंसद है? कोमेंट करके बताइए|
 
February 04, 2022

बिल्ली और बन्दर की कहानी/ पंचतंत्र की कहानी/बाल कहानियां/billi or bandar ki kahani

 

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बिल्ली और बन्दर की कहानी/billi or bandar ki kahani

इस कहानी में हम दो बिल्लियों के आपसी झगड़ें और बन्दर को फायदा होता है|बिल्लियों को मुर्ख बनाकर बन्दर  बिल्ली का खाना खा जाता है| दो बिल्लियों or बन्दर की कहानी पंचतंत्र की बाल कहानी है| कहानी शुरू करते हैं| 

billi or bandar
Billi or bandar ki kahani

बिल्ली और बन्दर की कहानी

एक समय की बात है, एक बड़े जंगल में दो बिल्लियाँ रहती थी| दोनों पक्की सहेलियां थी| एक दिन दोनों को सुबह से खाने को कुछ नहीं था| दोनों ही बहुत भूखी थी| घूमते-घूमते बिल्लियाँ एक गाँव में पहुंची| दोनों ने मिलकर एक घर से रोटी चुरा लिया और जंगल में वापस आ गयी| दोनों को आपस में बाँटकर खाने की आदत थी| उस दिन एक ही रोटी मिली थो or दोनों को बहुत भूख लगी थी| आज कोई कम - ज्यादा नहीं ले सकता था| दोनों बिल्लियाँ रोटी को लेकर लड़ने-झागने लग जाती है| थोई देर बाद फिर सोचने लगती है की हम किसी or से रोटी को बटवा लेते है, लेकिन रोटी को बराबर कौन बंटेगा?  रोटी को बराबर कैसे बांटे?
 

कुछ सोचकर एक बिल्ली ने कहा बन्दर के पास तराजू है| चलो बन्दर के पास वो रोटी बराबर बाँट देगा| दोनों बन्दर के पास गयी or बोली बन्दर भैया इस रोटी को बराबर भागों में बांट दो| बन्दर भी आज भूखा था, उसे भी भूख लगी थी| उसने सोचा मांगने से रोटी नहीं मिलेगा| फिर बन्दर बोला - ठीक है, रोटी दो बाँट देता हूँ|   बिल्लियों ने रोटी दे दिया| बन्दर ने तराजू निकला or रोटी को दो भागों में बाँटकर तराजू पर रख दिया| तराजू उठाकर तौलने लगा| तौलते समय तराजू एक तरफ ज्यादा झुक गया|  बन्दर ने रोटी तोडकर खा लिया| 

billi or bandar ki kahani 

बिल्लियाँ बोली- तुमने रोटी क्यों खाई|
बन्दर बोला- एक तरफ ज्यादा था बराबर करने लिए थोडा-सा खा लिया|
बिल्लियाँ बोली- ठीक है |
बन्दर ने फिर से तराजू उठाया और तौलना शुरू किया, इस बार भी एक तरफ थोडा-सा ज्यादा हो गया| बन्दर ने इस बार भी रोटी तोडकर खा लिया| बिल्लियों ने सोचा बराबर करने के लिया खाया है|  ऐसे ही करते- करते बन्दर धीरे -धीरे पूरा रोटी खा जाता है or बिल्लियों को कुछ नहीं मिलता है| उस दिन दोनों बिल्लियों को भूखा रहना पड़ता है| 
 
शिक्षा - हमें आपस में नहीं लड़ना चाहिए, आपस की लड़ाई में कोई तीसरा फायदा उठा लेता है| जैसे अपने इस billi or bandar ki kahani कहनी में देखा की बिल्लियों की रोटी बन्दर खा गया or बिल्लियों को भूखा रहना पड़ा|
नोट- यह कहानी आपको कैसी लगी कोमेंट करके जरुर बताए| आप यहाँ पर और भी कहानियां पढ़ सकते है| आपको किस प्रकार की कहानी पंसद है? कोमेंट करके बताइए|