ग़ज़ल
हुआ है जिस पे दिल शैदा हमाराउसी ने रास्ता छोड़ा हमारा
कभी आकर ज़रा ये पूछ लेते
सफ़र कैसे कटा तन्हा हमारा
सफ़र कैसे कटा तन्हा हमारा
भरी दुनिया में तन्हा फिर रहे हैं
कोई तो हमसफ़र होता हमारा
कोई तो हमसफ़र होता हमारा
कभी वो कर के वादा फिर न आएं
इसी उलझन में दिल उलझा हमारा
इसी उलझन में दिल उलझा हमारा
ख़ुशी तो दो घड़ी ही पास ठहरी
रहा ग़म से मगर रिश्ता हमारा
रहा ग़म से मगर रिश्ता हमारा
बलजीत सिंह बेनाम
सम्प्रति:संगीत अध्यापक
उपलब्धियाँ:विविध मुशायरों व सभा संगोष्ठियों में काव्य पाठ
विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित
विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित
आकाशवाणी हिसार और रोहतक से काव्य पाठ
सम्पर्क सूत्र:103/19 पुरानी कचहरी कॉलोनी
हाँसी:125033
सम्प्रति:संगीत अध्यापक
उपलब्धियाँ:विविध मुशायरों व सभा संगोष्ठियों में काव्य पाठ
विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित
विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित
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सम्पर्क सूत्र:103/19 पुरानी कचहरी कॉलोनी
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