व्यंग्य बाण
नया नियम देख धीरज,तन से निकले प्राण।
जितने की न फटफटिया,वा से दुगनो चालान।।
लाइसेंस बिना जेब में,बिन माथे पर हेलमेट।
पांच सौ की जुगाड़ करे,पुलिस फुलावे पेट।।
नए नियम स्वीकार कर,बिगड़े सब के काज।
बिना हेलमेट रोड़ पर,कल धरे गए यमराज।।
भारी भरकम जुर्माने से,बजा मजनुओं का बैंड।
एक ऒर चालान का खर्चा,दूजी ऒर गर्लफ्रेंड।।
कवि धीरज पचवारिया✍
नरसिंहगढ़ (म.प्र.)
Whatsapp No.- 8120287397


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