प्रभात वर्णनम्
निकसत रवि प्रचंड, विकसत मार्तण्ड।
तिमिर होत खंड-, सुषमा अधिकाई।।
क्षितिज रक्त चंड, भेदत ब्रह्मण्ड।
फूले श्री खण्ड, कुमुद सकुचाई ।।
मानों किरण जाल, चमचमात भाल।
रश्मि ज्वाल जाल, घेरे तरुणाई।।
नभ निरम्भ, विगलित सर्व दम्भ।
पुष्पित कदम्ब, हृदय अति हर्षाई।।
सर उठत हिल्लोल, खग करत कल्लोल
तिमिरांचल डोल - डोल, धरा सरसाई।।
निकरत गौ झुंड, नहिं गिनात मुंड।
पियत नीर कुंड, तृषा बुझाई।।
घंटा घहरात , कछू ना सुनात ।
स्तुति करत अद्य, भक्त समुदाई।।
कर्ण परै वेद ध्वनि, ध्यान धरै मुनि।
कुसुम चुनि - चुनि, संभु सिर चढ़ाई।।
रंग वरनत प्रभात, सुखी पात - पात।
मोद आज अधिकात, जन बहु सचुपाई।।
स्वरचित मौलिक । ।कविरंग ।।
पर्रोई - सिद्धार्थ नगर( उ0प्र0)


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