बेटियाँ
माता- पिता की अरमान होती बेटियाँ।
घर की शानो शौकत खानदान होती बेटियाँ।।
बेटों का नाम आज जबरन है समाज में।
आज्ञा पालन में महान होती बेटियाँ।।
पीछे ही रहते बेटे कर्तव्य निर्वहन में सदा।
कर्तव्य पालन की अवधान होती बेटियाँ।।
बनके बेटी चावला सानिया रजिया जैसी।
पूरे परिवार की अभिमान होती बेटियाँ।।
दर्द भरी आवाज सहन नहीं उनको।
पग - पग पर करुणावान होती बेटियाँ।।
सीता सावित्री अनुसूया बन समाज में।
आदर्श प्रतिस्थापन की प्रतिमान होती बेटियाँ।।
सृष्टि संचालिका पालिका जन-जन की।
सहनशीलता में वरदान होती बेटियाँ।।
आपत्ति - विपत्ति मार और लताड़ सह।
जग मे धरा जैसी धैर्यवान होती बेटियाँ।।
ममता ममत्व मोह हिये में बसाये हुए।
परोपकार के लिए सदा कुर्बान होती बेटियाँ।।
स्वरचित मौलिक ।।कविरंग ।।
पर्रोई - सिद्धार्थ नगर (उ0प्र0)

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