मोहब्बत दिल से होती है
मोहब्बत सूरत से नहीं होती है।
मोहब्बत तो दिल से होती है।
सूरत खुद प्यारी लगने लगती है।
कद्र जिनकी दिल में होती है।।
मुझे आदत नहीं कही रुकने की।
लेकिन जबसे तुम मुझे मिले हो।
दिल कही और ठहरता नहीं है।
दिल धड़कता है बस आपके लिए।।
कितनो ने मुझ से नज़ारे मिलाई।
पर किसी से नज़रे मिली नहीं।
दिल की गहराइयों में तुम थी।
इसलिए दिलने औरो को चाहा नहीं।।
बड़ा ही साफ़ पाक रिश्ता है।
जनाब, रिश्ता ये मोहब्बत का।
दरवाजे खोल जाते है जन्नत के।
जिनको सच्ची मोहब्बत होती है।।
संजय जैन (मुंबई)
16/05/2019

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