।। हास्यमेव जयते।।
शादी नहींवो था एक्सीडेंट।
व्याह के लाया
सुख ना पाया
जूठा-कूठा खाया
मम्मी - पापा को रुलाया
कभी काम न करती
कहती मै हूँ स्टूडेंट।।
मेकअप मे डूबी
वही इसकी बखूबी
औरत नहीं अजूबी
नाम है रूबी
उड़ेले तन पे सेंट।।
सुबह को सोती
साम को सोती
जगाने पर रोती
पहनी कभी न धोती
पहने रहती पैंट।।
जब से आयी
वो ऐसी लुगाई
घर को जलाई
खाती मलाई
मांग उसकी है अर्जेंट।।
होंठों पे लाली
जुबान पे गाली
बालों मे जाली
गुटखे से मुख ना खाली
खाती खैनी पर्मानेंट।।
आयी होली
कुछ ना बोली
भीगी रंग से चोली
आयी युवकों की टोली
पोती सबके मुख पर पेंट।।
मै तो गया हारा
रहता मारा- मारा
देखता हूँ इशारा
चढ़ा रहता पारा
हर पल कसती टेंट।।
थी मोटी और काली
उजड़ा बाग बिन माली
वैसे ही मेरी साली
पग रखती हाली-हाली
चलती जैसे एलीफैंट।।
स्वरचित मौलिक
।। कविरंग।।

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