ऎसा था यह प्यार
आंखों के सामने हजारों है
लेकिन दिल् में कई नहीं
दर्द इस बात से होता है
वह मिल कर भी मिला नहीं
हम चाहते थे कुछ और
वह चाहते थे कुछ और
इसीलिए हमारे बात बना नहीं
जुदा तो कितना होता है
कीयूं ईन जुदाई पर इतना गम
आंखों तो लाखों देखा है
लेकिन उन्हं आंखों कीयूं इतनी कम
हम तो मरते हैं हर रोज
तुम्हारे बिना
हम द्बन्द में हैं
यह प्यार था या था हमारे भ्रम
खामोश के पल ओर आछा नहीं लगता
सबकुछ लागे बिखरे बिखरे शून्य शून्य
अभी हम और हम रेहा नहीं
बेघर हुए हैं मौसम,
शाबन के पानी, फगुन् के रंग,
फुल के खुश्बू
वह वित् गया पल् कीयूं आया नहीं..
- सब्यसाची बिषोयी
नबरञ्गपुर(ओडिशा)

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