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तेरे होठों को चूम लूं

हम अपने साथ अपनों का नाम जोड़ जाते हैं

काम ऐसा करते हैं कि छाप छोड़ जाते हैं |

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मेरे किरदार मेरे हाथों में बसते हैं

जैसे चाहूँ उन्हें  वैसे नचा लेता हूँ ||

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करीब आजा तुझे बाहों में लेकर घूम लूं

सीने  से  लगा  लूं तेरे  होठों  को चूम लूं ||

_______[लोकेश कुमार 'रजनीश(साहिब)]

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