हिंदी भाषा
।। 1।।
हिंदी हिंद भूमि की सुगंध औ मिठास यह
हिंदी शब्द फारसी भाषा से डड़ियान है।
भाषा संस्कृत की सुता समतुल्य भाषा यह
कबीर मीरा तुलसी जायसी की प्रान है।।
चीनी के बाद विश्व में अधिक बोलते इसे
जग की दस भाषाओं में बड़ी महान है।
फीजी गायना मारीशस सूरीनाम नेपाल में
आबूधाबी में इसकी अन्य पहिचान है।।
।। 2।।
यूरोपीय भाषा परिवार की दुलारी यह
ईरानी शाखा के आर्य उपशाखा में आती है।
न्यूजीलैंड में चौथी अधिक बोली जाती यह
संयुक्त अरब अमीरात में भी सोहाती है।।
देशी भाषा देशना वचन विद्यापति कहें
हिंदवी दक्खिनी रेखता से जानी जाती है।
खड़ी बोली भारती नामो से भी बोलते इसे
अवहट्टोत्पन्न कवियों की शाहजादी है।।
।। 3।।
ये हिन्दी की बेलि दुनिया में फैली-फूली आज
स्वदेश में निज पहिचान को गँवायी है।
कहतीं कवियों की सुबानी अमर कहानी
बनी न राष्ट्रभाषा राजभाषा ही कहायी है।।
है बढ़ रहा इसका सब देशों में सम्मान
पर अपने देश में अस्मिता छिपायी है।
विहारी देव मतिराम जैसे ही ज्ञानवान
हिंदी ही के शान अरमान को बढ़ायी है।।
।। 4।।
नित्नूतन नवीन प्राचीन में प्राचीन अति
अर्वाचीनता नवीनता लिए शरमायी है।
कहत कबीर केशव कूका मलूका सब
जान-जान प्रान - प्रान सबके समायी है।।
विचार चारु समाचार निकसत याही में
देश-विदेश हरदेश फैली अँगडा़यी है।
रंग बदरंग होत खोवत निज आस सब
आज राष्ट्रभाषा हेतु गोहार लगायी है।।
स्वरचित मौलिक ।।कविरंग ।।
पर्रोई - सिद्धार्थ नगर (उ0प्र0)

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