सुता-समत्व
।। 1।।
जिम्मेदारी का है ज्ञान दुनिया में पहिचान,
बचायी आत्म सम्मान सम्पूरन जहान में।
बेटा-बेटी एक सब भिन्नता न लाओ अब
गया है समाज दब सुता औ संतान मे।।
बेटे को प्यार अधिक माता ही बनी बधिक
सच-सच आज लिख उजड़े बगान में।
उड़ाती जहाज अब चलाती दुकान सब
काम से हैं ऊबी कब जग के विहान में।।
।। 2।।
माता-पिता को ज्ञान हो सच्चाई का भान हो,
सम - सम इमान हो तो बेटी को प्यार दो।
बदलेगी दुनिया ये बुद्धिमत्ता को साथ ले,
तूं पीठ पर हाथ दे पेट में न मार दो।।
इससे ही संसार है सह रही वो मार है,
तेरे हार में हार है प्रेम का संचार दो।
जीवन की प्रसार मै प्रकृति उपहार मै
प्रेम की ही आभार मै न हमे संहार दो।।
।। 3।।
पालन में हूँ निपुण मुझसे ही हैं त्रिगुण,
ईश्वर किया सगुण बेटी से अंजान है।
बेटी को पढा़ओ तुम ना उसे सताओ तुम
क्यों उसे जलाओ तुम कहा हिंदुस्तान है।।
मोदी वाक है प्रखर सुता रही है निखर
पकड़ी उच्च शिखर आज पूजमान है।
समाज को सुधार दो उसे असीम प्यार दो
खुशियां अपार दो वही खानदान है।।
स्वरचित मौलिक । ।कविरंग ।।
पर्रोई - सिद्धार्थ नगर( उ0प्र0)


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