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कृपणता यानी बुद्धि संकीर्णता

लघुकथा

         कृपणता यानी बुद्धि संकीर्णता


गुड़िया देवी जुबान ऐंठकर बोली - सुनते हो जी गेहूं की पैदावार अच्छी हुई है मै बिना हार बनवाये मानने वाली नहीं।
गुडमैन - ठीक है देवि पहले खाने के लिए व्यवस्थित कर दो। जब भोजन - पानी से बचेगा तो तुम्हारी ख्वाहिश पूरा कर दूंगा।
गुड़िया - मै कुछ नहीं जानती मेरे भतीजे की शादी है उसमें हमे जाना है। हां एक नयी डेहरी भी लाना है गेहूँ स्टोर करने के लिए, उसे आज ही ला दो।
गुडमैन - ठीक है मै अभी डेहरी लेने सकारपार जा रहा हूँ वहां से आने के बाद ही भोजन करुंगा।
          यह कहकर गुडमैन डेहरी के दुकान पर पहुंच गये तथा तमाम डेहरी देखने परखने के बाद एक डेहरी पसन्द आ गयी और उसे खरीद लिए। परेशानी उसे घर भेजने के लिए किसी साधन की जरूरत थी जिसके लिए अतिरिक्त पैसा देना पड़ता वो भी अधिक नहीं मात्र 50 रुपये गुडमैन उसे भी नहीं देना चाहते थे पर डेहरी जाय कैसे समझ मे नहीं आ रहा था उसी मौके पर उनके परम मित्र पंकज सर आ गये उन्होंने उनसे कहा कि आपके चाचा की जीप चलती है गुडमैन इतना सुनते ही खिलखिला कर हँस दिये कहा बस आपने तो हमारी सारी समस्या ही हल कर दिए। अब क्या था सुबह 10 बजे से लेकर साम 5 बजे तक बिना खाये पीयें जीप का इन्तजार कर रहे थे। होंठ सूखकर काले पड़ गये थे इतने में जीप दिखाई दी जिसपर बहुत लोग बैठे थे तथा ऊपर अधिक सामान भी बंधा था। अब महोदय चालक पर दबाव देकर अपनी डेहरी भी बधवाँ दी। चालक कमांडर के बीच वाली सीट के अंतिम बायें किनारे पर इन्हें बैठा दिया।
                जीप पुनः स्टार्ट हुई और चलने लगी तब ड्राइवर ने कहा मालिक डेहरी रस्सी के अभाव में कायदे से बंधी नहीं है उसे एक हाथ से सहारा देते रहियेगा। उन्होंने कहा मै बीच वाले सीट के बगल हूँ और खड़ा हूँ तथा अपना एक हाथ डेहरी पर लगाया हूँ दूसरे से जीप का सिकचा पकड़े हूँ चलो। ड्राइवर तेजी से चला उधर आगे तगड़ा मोड़ था ज्योही जीप मुड़ी रस्सी टूट गयी डेहरी ऊपर से चल दी गुडमैन सिकचा छोड़ दोनों हाथों से डेहरी को पकड़ लिया इधर एक पैर जीप के स्टैंड पर बाहर था तथा एक पैर भीतर था जब डेहरी दोनों हाथों से पकड़े त्यों ही पूरी शरीर बाहर आ गयी डेहरी दूर तालाब में जा गिरी गुडमैन जमीन पर कई बार पलटते हुए एक खन्ध में जाकर रुके। ड्राइवर हक्का - बक्का हो गया। डेहरी विटुर कर 5कुंतल की जगह 50 किग्रा लायक रह गयी और गुडमैन के भौंहें उकच गयीं भूभुन भसक गया पैर के पास तथा कलाई से रक्त रिसकर गड्ढे में भर गया था। ड्राइवर डेहरी छोड़ उन्हें लेकर अस्पताल गया जहां डाक्टर ने बताया कि कलाई तथा पैर की हड्डी फैक्चर हो गयी है इसके आप्रेशन में लगभग 32 हजार रुपये लगेगें। क्या ड्राइवर वहां से आकर सारा गेहूँ बेचा और 32 हजार दवा मे खर्च किया। इधर गुड़िया देवी यह हालत देखकर अपने जेवर की जिद छोड़ आंखों में आंसू भरकर अपने नसीब को कोस रही थीं। टूटी - फूटी डेहरी जिसमें रखने के लिये कुछ शेष नहीं बचा वह भी सामने रखी थी जिससे गुड़िया का क्रोध दूना हो रहा था। गुडमैन 50 रुपये की बचत किये पर - - - - - -

स्व लिखित                ।। कविरंग।।
              पर्रोई - सिद्धार्थ नगर( उ0प्र0)

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